MBA फेल कचौड़ी वाला!!क्या बात है!!!

फर्रुखाबाद. कहते हैं कि जितने वाले हर को भी जीत का रास्ता बना लेते हैं,और इसे साबित कर दिखाया सत्यम ने।उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद  युवक सत्यम मिश्रा ने आवास विकास कॉलोनी में ठेला पर ‘एमबीए फेल कचौड़ी’ वाला चर्चा का केंद्र बना हुआ है. बीएससी पास सत्यम ने आर्थिक स्थिति ठीक ना होना और परिवारिक बोझ के तले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रेरित होकर यह काम किया है. फिलहाल एमबीए फेल कचौड़ी वाले की दूकान पर अब ग्राहकों की भीड़ लगने लगी है. ‘एमबीए फेल कचौड़ी वाला’ नाम क्यों? इसके जवाब में युवक से जुड़ी जो कहानी पता चलती है, वो न केवल दिलचस्प है बल्कि बहुतों को प्रेरणा और हौसला देने वाली है.

दरअसल, संजय ने बीएससीजहां एक तरफ उसके पढ़ाई का बोझ वहीं दूसरी तरफ परिवार को पालन पोषण करने की जिम्मेदारी रही. अब उस जिम्मेदारी को वह कचौड़ी बेचकर पूरा कर रहा है. बता दें कि सत्यम मिश्रा कायमगंज तहसील के ग्राम दीप नगरिया के निवासी हैं और 6 भाई बहन हैं. उन्होंने बताया मेरी चार बहने जिनमें तीन बहनों की शादी हो चुकी है और एक भाई है और मेरे माता-पिता भी है. उसने बताया कि रोजगार बढ़ने व समय मिलने पर पर वह पुनः एमबीए करेगा और अपना यह काम बंद नहीं करेगा. उसने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी से प्रेरित होकर यह काम मैंने शुरू किया है. ठेले पर डिजिटल भुगतान की व्यवस्था भी कर रखी है. इधर, लोगों का कहना है कि वह उसका खाना बहुत ही स्वादिष्ट और मजेदार है. पास करके एमबीए करने का सोचा और पढ़ाई शुरू भी कर दी, मगर, अपने परिवार की खराब आर्थिक स्थिति के चलते पढ़ाई पर ध्यान न दे सका और फेल हो गया. चार साल गुजर गए, मगर एमबीए का सपना और हौसला दृढ़ है. पढ़ाई में आर्थिक तंगी आड़े न आए, इसलिए एक माह से कचौड़ी का ठेला लगाना शुरू कर दिया है. अच्छी कमाई की आस के साथ जीवन के अच्छे दिन लाने का प्रयास शुरू कर दिया है. संजय का साथ दे रहा है उसका भतीजा, जो हाईस्कूल फेल है.

जहां एक तरफ उसके पढ़ाई का बोझ वहीं दूसरी तरफ परिवार को पालन पोषण करने की जिम्मेदारी रही. अब उस जिम्मेदारी को वह कचौड़ी बेचकर पूरा कर रहा है. बता दें कि सत्यम मिश्रा कायमगंज तहसील के ग्राम दीप नगरिया के निवासी हैं और 6 भाई बहन हैं. उन्होंने बताया मेरी चार बहने जिनमें तीन बहनों की शादी हो चुकी है और एक भाई है और मेरे माता-पिता भी है. उसने बताया कि रोजगार बढ़ने व समय मिलने पर पर वह पुनः एमबीए करेगा और अपना यह काम बंद नहीं करेगा. उसने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी से प्रेरित होकर यह काम मैंने शुरू किया है. ठेले पर डिजिटल भुगतान की व्यवस्था भी कर रखी है. इधर, लोगों का कहना है कि वह उसका खाना बहुत ही स्वादिष्ट और मजेदार है.

 

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