सनसनी खेज वारदात बुजुर्ग ने पत्नी की की हत्या।

फतेहपुर, –शक का कीड़ा किस उमर में घर कर जाए कोई पता नहीं।कुछ ऐसा ही हुआ फतेहपुर के बुजुर्ग के साथ।शादी के उनचास साल हंसी खुशी बिताने के बाद इस बुजुर्ग के दिमाग में अपनी पत्नी को लेकर शक पैदा हों गया । उसका इस बात को लेकर पत्नी से झगड़ा भी हुआ और अंत में उसनेनापने जीवन के सबसे बड़े सहारे को खुद ही खत्म कर दिया।प्राप्त जानकारी के मुताबिक 47 बसंत हंसी खुशी साथ गुजारे, जिंदगी के तमाम उतार चढ़ाव का मिलकर सामना किया। फिर क्या हुआ कि अचानक पत्नी के चरित्र पर शक करने लगा? लोगों ने भी सनकी व पापी मन का आदमी मान लिया।

नतीजा बुजुर्ग ने उसी सहारे को मार दिया, जिस सहारे की उसे आखिरी दिनों में सबसे ज्यादा जरूरत थी। क्या उसे हत्या जैसे संगीन अपराध की सजा के साथ ही बीमारी के इलाज की जरूरत नहीं?

शिवबरन का विवाह करीब 49 साल पहले ललिता देवी उर्फ लाली के साथ हुआ। इस दौरान दोनों पांच पुत्रियों व दो पुत्र के माता-पिता बने। जानकारी के मुताबिक करीब दो साल से शिवबरन  सिजोफ्रेनिया नामक बीमारी के चपेट में आ गया था । जानकारी के अभाव में परिजनों ने भी कोई सुध नहीं ली। सनकी व मानसिक कमजोर मानकर उसे उसके हाल पर छोड़ दिया और डांटते फटकारते रहे। जबकि उम्र के आखिरी पड़ाव पर जीवन संगिनी के चरित्र पर शक बुजुर्ग की सनक नहीं बल्कि सिजोफ्रेनिया नामक बीमारी के लक्षण रहे। बीमारी के चपेट में आए बुजुर्ग के हाथों हत्या जैसा जघन्य गुनाह हो गया। परिवार संग जीवन के बचे दिन बिताने के बजाए उसके दिन रात जेल की काल कोठरी में बीतेंगे।

 

जानिए पूरी कहानी

असोथर थाना क्षेत्र के सरवल गांव निवासी शिवबरन विश्वकर्मा ने बुधवार की रात अपनी ही पत्नी ललिता उर्फ लली की कुल्हाड़ी से गले पर वारकर हत्या कर दी थी। घटना करने के बाद आरोपित बुजुर्ग फरार होने के बजाए मृत पत्नी की चारपाई के नीचे ही छिपा रहा। सुबह पड़ोसियों ने देखा तो घटना की जानकारी हुई। आरोपित के बेटे बब्लू की तहरीर पुलिस ने शिवबरन को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

क्या कहता है मनोरोग विज्ञान मनोरोग

मनोरोग विज्ञान के मुताबिक शक करना ,चिड़चिड़ापन, अनकही बातें सुनाई देना, अचानक डर लगने लगना, हमले की आशंका होना, अपनी बुराई करने का शक करना आदि लक्षण सिजोफ्रेनिया बीमारी के लक्षण हैं। सिजोफ्रेनिया तेजी से फैल रहा है। खासकर 16 से 40 की उम्र वाले युवा चपेट में आ रहे हैं। जानकारी के अभाव में लोग ध्यान नहीं देते या झाड़ फूंक के चक्कर में उलझ जाते हैं। ऐसे मरीजों को काउंसिलिंग व सही इलाज से सही किया जा सकता है।

लेकिन पिछड़े क्षेत्र में रहने के चलते बुजुर्ग इलाज की सोच भी नहीं पाया और उसने अपने ही हाथों अपना बुढ़ापा बिगाड़ लिया और एक महिला को जान से हाथ धोना पड़ा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *